मिथिलांचल टुडे मैथिलि पत्रिका

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गुरुवार, 5 मार्च 2015

मशखरी


ल रिमोट के हाथ में देखू
आब बैन गेलहुं ओपरेटर
हमरे अछि भिसियार टीबी
 हमरे अछि जनरेटर
ल रिमोट के हाथ में देखू
 !! आब बैन गेलहुं ओपरेटर

हमरे हाथ में दुनियां अछि
सब हमर हाथक कठपुतली
जिम्हर घुमेबई ओम्हरे घुम्तई
अछि हमरा हाथ में शुतली
ओतबे चलतै, जतेक दबेबई
पैर तरक एक्सलेटर
ल रिमोट के हाथ में देखू
!! आब बैन गेलहुं ओपरेटर

कुकुर सन अध्मौगैत सब दिन
मुदा आई बनल छि ढीठ
अन्हरा कुकुर माड़े तिरपित
चटैत पुलौसी खीरक मीठ
गैढ़ ​​पढैया की आदर दैया
सब मिल कहै भप्लेटर
ल रिमोट के हाथ में देखू
 !! आब बैन गेलहुं ओपरेटर

मोन भेटल अछि भरना पर
नै अपना पर अछि काबू
हमरा सन नै काबिल कियो
नै हमरा लग कियो बाबु
चढल गुमान मुहं छुटल लगाम
लिखैछी मोन के लवलेटर
ल रिमोट के हाथ में देखू
 !! आब बैन गेलहुं ओपरेटर 
प्रेम रस


अछि प्यास्ल मोन त पिबैत चैल जाऊ ...... ..2
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !! 2
मोनक बेगरता अछि, प्यासल अछि कंठ

घुट- घुट नै जिबू ऐना बनू नै चंठ ...... ..2
अछि ललसा जे मोनक कहैत चैल जाऊ !! 2
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !! 3

मन्ल्हूँ जे पिने हायब बहुतो जंहा के
प्यासल अछि मोन जे तैयो आन्हा के ...... .2
अछि प्रेमक ई धारा बहैत चैल जाऊ !! 2
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !! 3

ससरल ने कंठ स एहन कुन पिबैत छि
पिबते उतैर गेल, तेहन की पिबैत छि ...... ..2
लिय चस्का ई प्रेम के डूबैत चैल जाऊ !! 2
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !!

अछि प्यास्ल मोन त पिबैत चैल जाऊ ...... ..2
गुण प्रीतम के बाटे गबैत चैल जाऊ !! 5  

(नविन ठाकुर) 

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

Bhrun Hatya

भूण हत्य|
आई मन में एकटा विचार भेल
किया समाज खराब भेल|
जनइत अछइत में
किया करई छै ...
समाज इ अपराध,
जै मालुम छै
भूण हत्या छै महापाप||
इ कथा मिथिला समाज के सिर्फ नहि अछि,
समस्त समाज में फैलइत इ पाप अछि|
जनइत अछइत में किया करई छै समाज इ अपराध,
जै मालुम छै भूण हत्या छै महापाप||
जै बेटा रहइत त मान करई छि,
बेटी रहइता त माईर फैकइ छि|
ओइ अबोध शिशु सै कि भेल एहन अपराध,
किया करई छै समाज एहन काज,
जै मालुम छै भूण हत्या छै मयहापाप||
सीता,मीरा, लछ्मीबाई तीनों छथीन,
आदर्श,प्रेम और वीरताक देवी,
कि नहि मिलन हीनकर सभक मैया बाबू के सम्मान?
आई कौन बेटा आइब करई छथीन जनक जी के नाम,
बेटी बचाऊ अहि में अछि सभक सम्मान,
जनइत अछइत नहि करु इ अपराध,
जै मालुम अछि भूण हत्या छै महापाप||
:"कंचन कुमारी झा"

शनिवार, 15 मार्च 2014

swabhiman

Swabhiman
आब जीबे क की करब,
जखन स्वाभिमाने नै रहल!
अपन पहिचान रहितो,
दोसरक पहिचान ल जीबे छी!!
आब जीबे क की करब,
जखन मातृभूमि सँ दूर भेलौ!
अपन खेत पथार रहितो,
दोसरक खेत पटबै छी!!
आब जीबे क की करब,
जखन मातृभाषा बिसरलौँ!
अपन समृद्द भाषा रहितो,
दोसरक बोली बजै छी!!
   :गणेश कुमार झा "बावरा"