मिथिलांचल टुडे मैथिलि पत्रिका

मिथिलांचल टुडे मैथिलि पत्रिका पहिल अंक लअके बहुत जल्दिय आबी रहल अछि,अपनेक सबहक समक्ष , किछू हमहूँ कहब आ किछु अहूँ के सुनब,देखू -- http://www.mithilanchaltoday.in/ , E- mail - mithilanchaltoday@gmail.com

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

गजल


तीतल हमर मोन हुनकर सिनेहसँ
भेलौं हम सदेह देखू विदेहसँ

के छै अपन, आन के, बूझलौं नै
लडिते रहल मोन मोनक उछेहसँ

नाचै छी सदिखन आनक इशारे
करतै आर की बडद बन्हिकऽ मेहसँ

छोडत संग एक दिन हमर काया
तखनो प्रेम बड्ड अछि अपन देहसँ

काजक बेर मोन सबकेँ पडै छी
"ओम"क भरल घर सभक एहि नेहसँ

मफऊलातु-फाइलातुन-फऊलुन (प्रत्येक पाँतिमे एक बेर)

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

गजल


अहाँ हमरासँ एना नै रूसल करू
कनी प्रेमक सनेसाकेँ बूझल करू

हमर जिनगीक बाटक छी संगी अहीं
करेजक बाट कखनो नै छोडल करू

बहन्ना फुरसतिक करिते रहलौं अहाँ
अहाँ कखनो तँ हमरो लग बैसल करू

बहुत मारूक अछि नैनक भाषा प्रिये
अपन नैनक कटारी नै भोंकल करू

करेजा हमर फुलवारी प्रेमक बनल
सिनेहक फूल ई सदिखन लोढल करू

अहीं जिनगी, अहीं साँसक डोरी हमर
करेजक आस नै "ओम"क तोडल करू

(मफाईलुन-मफाईलुन-मुस्तफइलुन)- प्रत्येक पाँतिमे एक बेर

बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

मिथिलाक गामघर: सरस्वती स्तोत्रम्‌ का पाठ

मिथिलाक गामघर: सरस्वती स्तोत्रम्‌ का पाठ: सरस्वती स्तोत्रम्‌ का पाठ :- विनियो ग ॐ अस्य श्री सरस्वतीस्तोत्रमंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः। गायत्री छन्दः। श्री सरस्वती देवता। धर्मा...

मिथिलाक गामघर: माँ सरस्वती द्वादश नामावली

मिथिलाक गामघर: माँ सरस्वती द्वादश नामावली: ज्ञानक देवी सरस्वतीकेँ प्रसन्न करबा लेल कतेको मंत्र, स्तुति आदिक रचना कएल गेल अछि। ओहिमेसँ एक गोट अछि माँ सरस्वतीक द्वादश नामावली स...

मिथिला महिमा


मिथिला महिमा

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मैथिलवंशक अमरसुमन यश इतिहासो अछि गावि रहल ।
अपूर्ण पञ्चम बालक शंकर त्रिलोक महिमा गाबि चुकल ।।

सीता सब मैथिल कन्या छथि पिता जनकपद पाबि चुकल ।
जगदम्बा जनकक आँगनमें बेटी बनि छथि आबि चुकल ।।

त्रिभुवनपति जामाता जिनकर सदेह-विदेह पद पाबि चुकल ।
धनुषयज्ञसँ पुरुषपरीक्षा मैथिल गुण-गौरव पावि रहल ।।

अज्ञानक आकर जग निसृत ज्ञानसुधा छथि पाबि चुकल ।
जगदम्बा उच्चैठ बसलि छथि कालीदासक माय बनलि ।।

शिवशक्ति कोमलकान्ति पदावलि कविकोकिल छथि गाबि चुकल ।
भक्तकवश त्रिभुनपति उगना सेवक बनि छथि आबि चुकल ।।

याज्ञवल्क्य मण्डन वाचस्पतिक मातृत्व मिथिला पाबि चुकल ।
गौतम गङ्गेश भट्टकुमारिल अवतार धरापर पाबि चुकल ।।

गङ्ङा गण्डकि कोसी ओ लक्षमणा जगत विदित बुवि भाबि रहल ।
कमला त्रियुगा अमृता ओ घेमुडा जगबागमती यश गाबि रहल ।।

जय मिथिला मैथिल मैथिली महिमा बनिकऽ आबि चुकल ।
अष्टम अनुसूचिक भाषा बनि मानक गौरव पाबि चुकल ।।

                                              कृष्णकुमार झा"अन्वेषक"
                                              सम्पादक मिथिला दर्पण
                                              सम्पर्क--०९५९४०८६८४८
                                               www.mithiladarpanonline.in

मिथिला दर्शन



मिथिला दर्शन


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आदिकालसँ विद्या-वैभव याज्ञवल्क्य जनकादि ॠषि वर्णन ।
भाव-भक्तिसँ ताकि-हेरिकऽ करारहल छी मिथिला दर्शन ।।

देह विहिन पितासँ उद्भव विदेहमाधव जिनकर नाम ।
मन्थनसँ मिथि जनक यज्ञसँ इक्ष्वाकु तत् पाओल उपनाम ।।

मिथिक बसाओल मिथिला जगत विदित भेल मैथिल नाम ।
जतय अयाची मण्डन मिश्रक महिमण्डित सारस्वत धाम ।।

गङ्गा आउर हिमालय मध्यक तपोभूमि छल मिथिला धाम ।
विदेहमाधव जतय बसाओल धरा-धाम पर सुन्दर गाम ।।

दक्षिण गङ्गा पश्चिम गण्डकि पूव कौसिकी तीभुक्ति महान ।
तुङ्ग हिमालय उतर विराजत सीमा गाओल वेद-पुराण ।।

जगदम्बा तनया शिव सेवक साधकगण सेवित श्रीधाम ।
वैद्यनाथ अवतरल तनय भऽ पिता अयाची शंकर नाम ।।

भाषा मधुर मधुपसँ भाषित कवि-कोकिलसँ कूजित गान ।
वीणा-वादिनि नादित नादक माधव चुम्वित मुरलीक तान ।।

शुक-शारिकाक शास्त्रक चर्चा दर्शन वर्णन भाव समर्पण ।
जय मिथिला जय मैथिली जय मैथिल जय मिथिला दर्शन ।।

                                              कृष्णकुमार झा"अन्वेषक"
                                              सम्पादक मिथिला दर्पण
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सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

रचना आमन्त्रण



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शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

मनुक्ख बनब कोना?


मनुक्ख बनब कोना?

छीः छीः धूर छीः आ छीः
मनुक्ख भ मनुक्ख सँ घृणा करैत छी
ओही परमेश्वर के बनाउल
माटिक मूरत हमहूँ छी अहूँ छी।

केकरो देह मे भिरला सँ
कियो छुबा ने जाइत अछि
आबो संकीर्ण सोच बदलू
ई गप अहाँ बुझहब कोना?

अहिं कहू के ब्राह्मण के सोल्हकन?
के मैथिल के सभ अमैथिल
सभ त मिथिलाक मैथिल छी
आबो सोच बदलू मनुक्ख बनब कोना?

अपना स्वार्थ दुआरे अहाँ
जाति-पाति के फेरी लगबैत छी
मुदा ई गप कहिया बुझहब
सभ त माँ मिथिले के संतान छी।

पाग दोपटा मोर-मुकुट
सभटा त एक्के रंग रूप छी
मिथिलाक लोक मैथिल संस्कार
एसकर केकरो बपौती नहि छी।

एकटा गप अहाँ करु धियान
सभ गोटे मिथिलाक संतान
जाति-पातिक रोग दूर भगाउ
सभ मिली कए लियअ गारा मिलान।

अपने मे झगरा-झांटी बखरा-बांटी
एहि सँ किछु भेटल नहि ने?
सोचब के फर्क अछि नहि कोनो जादू टोना
अहिं कहू आब मनुक्ख बनब कोना?

बेमतलब के गप पर यौ मैथिल
अहाँ एक दोसरा स’ झगरा करैत छी
माए जानकी दुखित भए कानि रहल छथि
ई गप किएक नहि अहाँ बुझहैत छी?

सामाजिक-आर्थिक विकास लेल काज करु
मिथिलाक माटि-पानि उन्नति करत कोना
केकरो स’ कोनो भेदभाव नहि करु
सप्पत खाउ अहाँ मनुक्ख बनब कोना?

सोमवार, 4 फ़रवरी 2013